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Sunday, December 30, 2007

फिल्म ३०० के खिलाफ


मध्य एशिया पर लगाई गई गिद्ध दृष्टि में अगला संभावित शिकार है ईरान। जिसकी नींव सांस्कृतिक स्तर पर रखी जा चुकी है। यकीन न हो तो हालीवुड़ की फिल्म '300' देख लें। अचानक हालीवुड को 480 ईसा पूर्व थर्मोपिलई के युद्ध की याद क्यो आई इसे आप बखूबी समझ सकते हैं। फ्रैंक मिलर के उपन्यास पर आधारित इस फिल्म में 480 ईसा पूर्व हुए थर्मोपिलई के युद्ध का वर्णन है। निर्माता वार्नर ब्रदर्स की इस फिल्म में दिखाया गया है कि उस युद्ध में किस तरह स्पार्टा की 300 सैनिकों की एक छोटी सी सेना ने तत्कालीन पर्सिया (आधुनिक ईरान)को नेस्तनाबुत किया था।
दुनिया भर में जनमत बनाने की कमान सभ्यता के ऐसे ही लुटेरों और दंभियों के जिम्मे है। लेकिन इस सांस्कृतिक हमले का विरोध शुरू हो चुका है। इस फिल्म के प्रतिरोध में ईरानी संगीतकार और लेखक यास ने एक बेहतरीन गीत लिखा है...



अग्रेजी अनुवाद
Listen. I want to tell you my intent
They want to erase my identity
The history of the land of the Aryans
Is screaming until we come to it
So now is the time for you to hear
Iran is my land the
The country which after 7000 years
Is still standing
And the hearts of Iranians – still like the sea
Hear this, my fellow Iranian, from YAS
I too for my land stand like a soldier
Hold Iran like a gem in your hand and say
My complaint will burst out like a shot
Let's stand together and sing our anthem
My sisters, my brothers, my fellow Iranians
Iran's civilization is in danger
All of us are soldiers beneath our flag
We won't let anyone spread lies about us
For us Iranians it is our calling
That we wear the symbol of 'Farvahar' around our necks
Our unity against an enemy is the cause of their distress
Iran's name for us is an honor
And our respect for her is like a thorn in eye for those
Who want to injure her

CHORUS:

- Like the thirst of a seed [wheat] for water
- Like the dampness of rain, the smell of earth
- Like you, pure eyes, like the feeling of its earth, for you
- My land. Singing for you is in my heart
- Singing of my land, is my feeling
- My love - the earth of this land – Iraaaan.

You want to say that we came from generations of Barbarians?
So take a look then to Takht Jamshid!
You're showing Iran's name in vein
So yours could be written big on a cover of a CD [DVD}?
I'm writing down your intentions in my book
I know why you wrote this film "300"
I know that your heart is made of stone and lead
Instead of using your art to make a culture of peace
In this sensitive air and bad atmosphere
You want to start fishing in murky waters [profiting]
But this I tell you in its original language
Iran will never be spoiled and surrendered
God has given you two eyes to see
Take a look and read the books written by
Saadi and Ibn-e-Sina, Ferdosi, Khayam or Molana Rumi
Always throughout history we were the start [on top]
But now YAS can't sit down quietly
Let Iran's name be marred by a few tricksters
I'll shred your intentions with the "razor of hope"
Who are YOU to speak of the history of Iran?

- CHORUS -

It was Cyrus The Great that started the peace
Freeing the Jewish from the grip of Babylon
Cyrus The Great wrote the first bill of human rights
That is why I carry my esteem and great pride
For my Iran. The history of my land
For the earth of this land which my body is from
Whatever part of the world you live my fellow Iranian
And till your blood flows through you
Don't allow yourself to be satisfied
That anyone can fool around with your heritage
The history of Iran is my identity
Iran – protecting your name is my good intent

6 comments:

Amit said...

जनाब, यदि यहाँ देखेंगे तो यह आपको पता चलेगा कि इस कहानी पर फिल्म आज से 45 वर्ष पहले भी बनी है। यह कहानी ऐसी है कि उस समय के बाद से युद्ध विज्ञान और रणनीती के हर स्कूल में इसका अध्ययन किया गया है, आज भी होता है।

इस फिल्म में दिखाया गया है कि उस युद्ध में किस तरह स्पार्टा की 300 सैनिकों की एक छोटी सी सेना ने तत्कालीन पर्सिया (आधुनिक ईरान)को नेस्तनाबुत किया था

आपका पता नहीं पर मैंने यह फिल्म भी देखी है और 45 वर्ष पूर्व आई 300 Spartans भी देखी है और दोनों में से किसी फिल्म में यह नहीं दिखाया कि स्पार्टा के ३०० सैनिकों ने पर्शिया को नेस्तेनाबूद किया। दोनों में सिर्फ़ स्पार्टा के ३०० बहादुरों और थेस्पिआ के ७०० रणबांकुरों(यह 300 में नहीं वरन्‌ 300 Spartans में दिखाया है और इतिहास के अनुसार सत्यता के निकट है) की वीरता दिखाई है कि वे ज़र्कसीस की सागर जैसी सेना के सामने डटे रहे और लड़ते हुए प्राण त्यागे। और यह इतिहास में दर्ज है कि थरमाप्ली की भीषण लड़ाई के बाद प्लैटेया पर ज़र्कसीस की बाकी सेना का मुकाबला अन्य यूनानी राज्यों की सेनाओं से हुआ था और ज़र्कसीस की सेना की इतनी मारकाट हुई थी कि वह आखिरकार अपनी सेना छोड़ के वापस पर्शिया भाग गया था।

अब जो इतिहास है सो है, उससे किसी की संस्कृति कैसे नष्ट होती है यह मेरे को समझ नहीं आता। कल को कोई फिल्म बनाता है जिसमें दिखाता है कि डेढ़ सौ वर्ष भारत अंग्रेज़ों का गुलाम रहा और कैसे अंग्रेज़ों ने भारतीयों का शोषण किया तो क्या उससे भारत की संस्कृति नष्ट हो जाएगी? या कोई यह फिल्म बनाता है कि कैसे बाबर ने दिल्ली का तख्त हासिल किया और मुग़ल सल्तनत की नींव रखी तो उससे भारत की संस्कृति नष्ट हो जाएगी?

दिनेशराय द्विवेदी said...

चुनौतीपुर्ण कविता पहुँचाने के लिए बधाई।

PD said...

मैं अमित जी की बातों से सहमत हूँ. मैंने भी दोनों सिनेमा देखी है और इसीलिए जब 300 देख रहा था तो मुझे पता चल गया था की ये इतिहास का सही-सही वर्णन नहीं है.. और इसीलिए उसे मनोरंजन के तौर पर देखा था.. खैर जो भी हो, मैंने उसे बहुत एन्जॉय किया था..

हाँ कविता पहली बार पढ़ा या सुना.. अच्छी लगी.. धन्यवाद.

इरफ़ान said...

नए साल में आप और भी अधिक ऊर्जा और कल्पनाशीलता के साथ ब्लॉगलेखन में जुटें, शुभकामनाएँ.

www.tooteehueebikhreehuee.blogspot.com
ramrotiaaloo@gmail.com

vinita said...

३०० की ऎतिहासिक पृष्ठभूमि एक बात है लेकिन उसका फिल्मी रुपान्तरण सिर्फ तथ्यों को नही रखता। इरानी सेना को दैत्यों, जादूगरों और पशुवत लोगों से भरा दिखाकर यह फिल्म जो कह रही है उसको समझने में किसी भी न्यूनतम राजनैतिक समझदारी रखने वाले को दिक्कत नहीं होनी चाहिए। फिल्म में लियोनायडस के जरिये कही गई बात कि दुनिया में सभ्यता और स्वतंत्रता कि आखरी उम्मीद स्पार्टा है,में निश्चित तौर से आज के पश्चिमी महाबलियों कि भाषा की दंभी गूंज सुनी जा सकती है। इतिहास कि इस तरह कि तोड़-मरोड़ का हर तरह से प्रतिरोध होना चाहिए, निश्चित तौरपर सांस्कृतिक रुपों में भी, जिसका ईरानी संगीतकार यास एक अच्छा उदाहरण पेश करते हैं।

Anonymous said...

अमेरिका में जो हो रहा है वह पाप है और ईरान चूंकि प्रतिरोध करता है वह पवित्र है, यह दृष्टि ठीक नहीं. फ़िल्म को फ़िल्म की तरह भी देख लीजिए. यह इतिहास बताएगा की ईरान की महान सरकार प्रगतिशील थी या अमेरिका की तानाशाही व्यवस्था सड़ी-गली थी. अलबत्ता यह याद रखना चाहिए की खुमैनी की क्रांति के बाद सबसे पहले ईरान में मार्क्सवादियों को खड़ा करके गोलिओं से उडाया गया था. उसके लिए कुछ हज़ार साल पीछे नहीं ३८ साल पीछे जाना है.