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Wednesday, December 26, 2007

शासक बनने की इच्छा


वहाँ एक पेड़ था

उस पर कुछ परिंदे रहते थे

पेड़ उनकी आदत बन चुका था

फिर एक दिन जब परिंदे आसमान नापकर लौटे

तो पेड़ वहाँ नहीं था

फिर एक दिन परिंदों को एक दरवाजा दिखा

परिंदे उस दरवाजे से आने-जाने लगे

फिर एक दिन परिंदों को एक मेज दिखी

परिंदे उस मेज पर बैठकर सुस्ताने लगे

फिर परिंदों को एक दिन एक कुर्सी दिखी

परिंदे कुर्सी पर बैठे

तो उन्हें तरह-तरह के दिवास्वप्न दिखने लगे

और एक दिन उनमें

शासक बनने की इच्छा जगने लगी !
-राजेश जोशी

2 comments:

परमजीत बाली said...

कुर्सी की महिमा ही न्यारी है।
बहुत बढिया रचना है।बधाई।

GURU JEE SAYS said...

Aur Yah Sach hai.....