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Tuesday, January 29, 2008

मौलिक होने की ज़िद...!!

आइये, जनमत के साथियों की मांग पर एक नया सिलसिला शुरु किया जाये...
जन संस्क्रिति मंच की गीत नाट्य इकाई 'हिरावल',पटना के गीतों की रेकोर्डिंग आपको सुनाते हैं.
'हिरावल' के बारे में जो लोग जानते हैं, वे हिरावल द्वारा तैयार गीतों की ताजगी और तेवर के मुरीद हुए बिना नहीं रहते, और जो नहीं जानते उन लोगों में लगातार कमी लायी जाये इसी विचार से ये कडी़ शुरु की जा रही है...
'हिरावल' अपने नाटकों और गीतों के माध्यम से बिहार के क्रान्तिकारी संघर्षों में कन्धे से कन्धा मिला कर लड़ने के साथ-साथ नये प्रयोगों के लिये भी जाना जाता है... चलिये कुछ नया- सा सुना जाये...
# 'मुक्तिबोध' की लम्बी कविता 'अन्धेरे में' का एक हिस्सा :


# 'कबीर' की रचना ' हमन है इश्क मस्ताना' :


# 'इंतसाब' जिसे लिखा है 'फ़ैज़ अहमद 'फ़ैज़' ने और जिसे
पहले भी कई व में कई मशहूर कलाकारों ने अपनी आवाज़ दी:


# फ़ैज़ की एक और रचना ' कुत्ते' :


# 'निराला' की एक रचना ' गहन है यह अन्धकारा' :


# समकालीन कवि वीरेन डंगवाल की कविता ' हमारा समाज' :


सभी गीतों में संगीत दिया है संतोष झा ने और गाया है संतोष झा और हिरावल के अन्य साथियों सुमन, समता, राजन, रोहित, बन्टू, विस्मोय और अन्कुर ने.
आगे की पोस्ट में 'हिरावल' के बारे में और जानकारी के साथ आप सुन सकते हैं
** 1857 के गीतों की recordings!!
** हिरावल के नाटक ' दुनिया रोज़ बदलती है' का पूरा video!!
** 'हिरावल' के कई live performances!!
** 'हिरावल' के गाये गये कई पुराने गीत...!!.
** और भी बहुत कुछ... इन्तज़ार करें...!!

2 comments:

Neeraj Rohilla said...

अगली कडी का बेसब्री से इन्तजार रहेगा,

अपूर्व said...

संतोष भाई और हिरावल के दूसरे साथियो-भाईयो,

रेयाज़ भाई के माध्यम से आप सबसे पहला परिचय हुआ था, चिड़िया वाला गाना तो शायद अमिताभ भाई का था, संतोष
भाई ने शायद - सबसे पहले चाहूँगा तुम्हारा एहसास - गाया था...साथियो - आप जो भी गाते हैं उसमें बोल-संगीत ही नहीं पवित्रता सुनाई देती है, ईमानदारी सुनाई देती है...आप सबको अभिवादन, आभार और अशेष शुभेच्छाएँ...आपके गाने मैंने डाउनलोड किए हैं, चोरी जैसी लगी, लेकिन ऐसे रत्न दुर्लभ होते हैं, तो ये टुच्चा कृत्य किया। संयोग बना तो आप चाहूँगा कि आप सबसे मिलना भी हो, रहता लंदन में हूँ, पर घर और मन पटने ही में रहता है...अपूर्व